वैदिक यंत्र :

संस्कृत शब्द ‘यंत्र’ का मतलब होता है, Machine या instrument. यंत्र हमारा काम आसान और शिघ्रता से करने मे सक्षम होते है. आज के आधुनिक समयमे जैसे सॉफ्टवेअर इंजीनियर्स कुछएक अल्फा-न्यूमरिक कोड, (Complex Alpha-Numeric Codes जो एक आम इन्सान कि समझके परे होता है) का प्रयोग कर Softwares बनाते है और वही कोड (Software) सही कमांड देते हि निर्धारित results (Desired Outcome) देने लगता है – तथा हमारे कार्यमें आसानी व् शीघ्रता बहाल करता है. बिलकुल उसी तरह प्राचीन समयमे हमारे ज्ञानी पूर्वजोने कुछ भूमितीय रचनाओ का उपयोग कर वैदिक यंत्र विकसित किये थे जो मनुष्य कि साधना मे आसानी एवं शिघ्रता बहाल करते है.

रचनाये: आधुनिक विज्ञानने भी यह स्वीकार किया है कि जिस तरह से ध्वनी, प्रकाश तथा विभिन्न रंगो कि अपनी एक frequency होती है, उसी तरह से विभिन्न आकार (Shapes) या भौमितीय रचनाये भी अलग अलग frequency पर कंपन करते है (vibrate होते है). और यह frequencies सजीव सृष्टी पर मनोवैज्ञानिक तरिके से असर करते है.  वैदिक यंत्र इसी तत्व पर आधारित होते है. ब्रह्मांड मे अनेक ज्ञात और अज्ञात शक्तिया वास करती है. वैदिक यंत्र उन शक्तियोंको Receive & Process करते हुए साधकको मनोवांच्छित फलप्राप्ती (Desired Goal) तक जलद  गतिसे एवम आसानी से पहुँचानेमें एक catalyst का कार्य करते है.

साधना मे आसानी एवं शिघ्रता: साधनाये अनेक तरह कि हो सकती है. अध्यात्मिक साधना से लेकर विशिष्ट कार्य कि साधना, ज्ञानसाधना से धनसंचय तक कि साधना, व्यापार से लेकर राजनीती कि साधना, रिपु दमन कि  (शत्रुओपर विजय पानेकी) साधना.. इन सभी कार्योमे (साधनाओमे) मनुष्य को कर्म के साथ साथ परमात्माकि कृपा तथा ईश्वरीय इच्छाशक्ती (Cosmic Desire) कि भी जरुरत होती है. केवल कर्म के सहारे भी मनुष्य मनोवांच्छित फल प्राप्त कर सकता है – पर उसमे अधिक समय और कठीण प्रयास कि जरुरत होती है. परंतु वैदिक यंत्र हमे अल्प प्रयास मे और अत्यल्प समय मे अपने साध्य तक पहुचने मे मदद करते है.

Frequently Asked Questions:

यंत्र क्या हॊते है?
वैदिक यंत्र विभिन्न वैदिक मंत्रो के Graphical Representations होते है. इन यंत्रोमे कुछ भौमितिकीय रचनाये जैसे कि त्रिकोण, सर्कल्स, फ्लोरल पेटल्स आदी का प्रयोग किया जाता है.

यंत्रो का उद्देश्य क्या होता है?
कुछ यंत्र सिर्फ ध्यान धारणा एवं अध्यात्मिक साधना के लिये होते है तो कुछ मनुष्य को मनोवांच्छित फल प्राप्ती हेतू होते है. देवताओके यंत्र होते है वैसे हि ग्रहो के भी यंत्र होते है. किसी भी देवताकि प्रतिमा से ज्यादा यंत्र सामर्थ्यशाली होते है. अत: अपने इष्ट देवता कि मूर्ती या फोटो का पूजन करने कि बजाय उस देवता के यंत्र का पूजन करना कई गुणा लाभदायी होता है.

क्या यंत्र रुपी यह Power Diagrams सही मे काम करते है?
यंत्रकी रचना बिन-चूक (Precise) हो और साथ मे यंत्र के अधिदेवता के मंत्रो का उच्चारण सुचारू ढंग से किया जाये तो यंत्र निश्चित तौर पे और अत्यंत शीघ्रता से अपना कार्य करते है.

भारत वर्ष मे यंत्रो का प्रयोग कब से किया जाता रहा है?
यंत्रो के प्रयोग का जीक्र हजारो साल पुराना है. प्राचीन ग्रंथो के अनुसार स्वयं देवाधिदेव महादेव अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती को यंत्रो के संदर्भमे कहते है: “देवताओ के लिये यंत्रो का वही महत्व है जो तेल का दिप के लिये या शरीर का मानवी जीवन के लिये.”

क्या यंत्र सिर्फ सोने या तांबे पर हो तो असरदार हॊते है?
यंत्र कि भौमितीय रचना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हॊती है न कि उसका material या माध्यम. यंत्रो का material मनुष्य कि भौतिक उन्नती का साथ समय समय पर बदलता गया है. पौराणिक दस्तऐवजो मे यंत्रो कि रचना भूमी पर – रेत या पत्थरो पर किये जाने का जीक्र है. बादमे मनुष्य ने भोजपत्र पर लिखने कि कला विकसित कि तो यंत्र भोजपत्र पर बनने लगे. मानव प्रगत हुआ और असे धातू संबंधी ज्ञान हुआ (Metallurgy), तो यंत्र सोने, चांदी, कॉपर कि प्लेट्स पर बनने लगे.

आज electronics का दौर है. हम screens से घिरे हुए है. ऐसेमे यंत्र भी डिजिटल फार्म (Digital Form) मे दिखायी देने लगे है. और माध्यम कोई भी हो यंत्र कि रचना का हमारी अंतरात्मा मे उतरना जरुरी है. It is important that we should connect to these shapes on mental and psychological level. और आज के युग मी हम डिजिटल ज्ञान से ज्यादा जल्दी जुड जाते है. इसलिये डिजिटल फॉर्म मे यंत्र अधिक शीघ्रता से हमारे मन और मश्तीष्क मे उतरते है.


यंत्र के प्रकार:

  • श्रीयंत्र: सुख, समृद्धी, सामाजिक प्रतिष्ठा, सभी ऐहिक सुखो का उपभोग लेते हुए अंत मे मोक्षप्राप्ती के लिये.

sriyantra

  • कुबेर यंत्र: ऐश्वर्यप्राप्ती तथा धन कि रक्षा के लिये.

kuber yantra

  • व्यापार वृद्धी यंत्र: व्यावसायिक उन्नती के लिये. अगर व्यापार धीमा चल रहा है तो कारोबार शीघ्रतासे बढने के लिये.

vyaparvrudhi

  • महामृत्युंजय यंत्र: शरीर स्वास्थ्य के लिये, अकाल मृत्यू कि संभावना से भयमुक्त होने के लिये.

Maha-Mrityunjaya-Yantra

  • सरस्वती यंत्र: शिक्षा और ज्ञान मे वृद्धी के लिये. वक्तृत्व मे सुधार लाते हुए संवाद कौशल मे सुधार लाने के लिये.

Saraswati-Yantra

  • कालसर्प दोष निवारण यंत्र: कालसर्प दोष निवारन हेतू.

kalsarp yantra

  • साई नाथ सिद्ध बीस यंत्र: साई उपासना हेतू.
  • सर्व कार्य सिद्धी यंत्र: हरएक कार्य मे सफलता हेतू.
  • लग्नयोग यंत्र: विवाह जल्दी से होने के लिये.

ग्रह यंत्र

  • सूर्य यंत्र:
  • गुरु (बृहस्पती) यंत्र:
  • शनी यंत्र:
  • शुक्र यंत्र:
  • चंद्र यंत्र:
  • मंगल यंत्र:
  • बुध यंत्र:
  • नवग्रह यंत्र:

यंत्रसाधनामे हमारी एक Revolutionary खोज:

Personalised Digital Yantra (Audio- Visual Clip that can be played in Mobile or Laptop):

हम डिजिटल फॉर्म में मंत्रोच्चार के साथ Personalised यन्त्र उपलब्ध करते है जो की मेटल या स्फटिक के यन्त्रोंसे कही ज्यादा असरदार तरीकेसे और आसानीसे कार्य करते है. और यह बात आज तक हमारे अनेक संतुष्ट users ने अनुभव की है. 

व्यक्तिगत डिजिटल यंत्र (Personalized Digital Yantra)

हम आपकी जन्मपत्री का अध्ययन कर, आपके मनोवांछित फलप्राप्तीहेतू उन विशिष्ट फलोके कारक भावोका और उन भावोके कार्येश ग्रहोका अध्ययन कर विशिष्ट ग्रह यंत्र Personalized Form मे Digital Yanta स्वरूपमें उपलब्ध कराते है. पूर्णतः विधिवत शास्त्रीय तरिके से बनाए गये इस यंत्र क्लिप के साथ आपको प्रतिदिन सिर्फ 10 से 15 मिनिटस तक ध्यान-धारणा (Meditation) करना है. यह एक ऑडिओ-व्हिज्युअल क्लिप है जो आप मोबाईल या लॅपटॉप मे play कर सकते है.

  • इस क्लिप के आरंभ मे शुद्धीकरण (पवित्रीकरण) मंत्र का उच्चारण होता है. जिससे साधक और उसके आसपास का वातावरण शुद्ध होता है.
  • तत्पश्चात आपके नाम तथा आपके गोत्र के उच्चारनके साथ पूजा संकल्प किया जाता है (किसी भी पूजा को लागू होने के लिये संकल्प बडा महत्वपूर्ण होता है).
  • गणेश पूजन, सर्वदेवता पूजनं, यंत्र गायत्री मन्त्र
  • और फिर यंत्रसाधना (यंत्र कि प्रतिमा और विशिष्ट मंत्र जाप सहित).

यह यंत्रसाधना कि एक शास्त्रोक्त पद्धती है – जिसमे हम आधुनिक तंत्रज्ञान (Audio – visual clip) का उपयोग कर, यंत्रकी प्राचीन विद्याको आधुनिक जीवनशैलीयोग्य एक नए आयाम के साथ आपकी सेवा में दाखिल कर रहे है.

इस पद्धती कि विशेषता यह है कि कुछ दिनो बाद आपको इस क्लिप कि जरुरत नही पडती है. मंत्र आपको मुखदगत (याद) हो जाते है और यंत्र कि रचना आपके मन:चक्षु तथा आपकी अंतरात्मा मे उतर जाती है. और पौराणिक मान्यताओ के अनुसार यंत्र का मानसिक दर्शन (Mental Visualization) यंत्र के लाभ के लिये सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. सुवर्ण यंत्र या कॉपर यंत्र या स्फटिक यंत्र से भी अधिक जलद गती से लाभ आपको इस डिजिटल यंत्र से होते है क्यू कि इसमे यंत्र साधना अत्यंत शास्त्रीय तरिके से संपन्न होती है.

II ओम नमः शिवाय II

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Rudraksha Mahima